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Satyameva Jayate 2 Review: मिलाप की मनमोहन देसाई को सच्ची श्रद्धांजलि, बनाया मसाला फिल्मों का कॉकटेल

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Satyameva Jayate 2 Review

 

Satyameva Jayate 2 Review: मिलाप की मनमोहन देसाई को सच्ची श्रद्धांजलि, बनाया मसाला फिल्मों का कॉकटेल

सत्यमेव जयते 2 – फोटो : अमर उजाला, मुंबई

 

  • Movie Review        :       सत्यमेव जयते 2
  • कलाकार                  :       जॉन अब्राहम , दिव्या खोसला कुमार , हर्ष छाया , गौतमी कपूर , जाकिर हुसैन , दया शंकर पांडे                                             और अनूप सोनी
  • लेख                         :       मिलाप मिलन जवेरी
  • निर्देशक                   :       मिलाप मिलन जवेरी
  • निर्माता                     :       टी सीरीज और एम्मे एंटरटेनमेंट
  • थिएटर                      :       25 नवंबर 2021
  • रेटिंग                         :      3/5

 

अपने करियर में अब तक 28 फिल्में लिख चुके और पांच फिल्में निर्देशित कर चुके लेखक निर्देशक मिलाप मिलन जवेरी का फिल्में लिखने और बनाने का फॉर्मूला तय है। बतौर निर्देशक उन्होंने लीक से हटकर एक फिल्म ‘जाने कहां से आई है’ बनाकर अपना निर्देशन शुरू जरूर किया लेकिन जल्द ही उन्हें भी समझ आ गया कि हिंदी सिनेमा को फॉर्मूला सिनेमा से बाहर निकालकर लाना इस भाषा की फिल्मों के कारोबार के हिसाब से एक जोखिम है। उनकी नई फिल्म ‘सत्यमेव जयते 2’ इससे पहले रिलीज हुई उनकी ही लिखी और निर्देशित फिल्म फिल्म ‘सत्यमेव जयते’ के सार को आगे बढ़ाती है। इन दोनों फिल्मों का डीएनए यही है कि समाज में फैले अपराधों को अपने बूते निपटाने निकला एक स्वघोषित निगरानीकर्ता है और उसके पीछे लगा एक पुलिस अफसर। इस बार ये दोनों काम एक ही कलाकार जॉन अब्राहम को मिले हैं। जॉन अब्राहम का एक और रोल फिल्म में किसान नेता का भी है। अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘महान’ या रजनीकांत की फिल्म ‘जॉन जानी जनार्दन’ जैसी ठेठ मसाला फिल्मों से खाद पाने वाली इस फिल्म में पानी मनमोहन देसाई की फिल्मों का है। बेटे का मां को खून सीधे चढ़ा देने देने वाले दृश्य में मिलाप इसे साबित भी करते हैं। फिल्म ‘सत्यमेव जयते 2’ एक तरह से मनमोहन देसाई को उनकी श्रद्धांजलि है। ये एक ऐसी फिल्म है जिसमें पटकथा की तमाम गलतियां इसके नायक के शोर में गुम हो जाती हैं।

 

Satyameva Jayate 2 Review: मिलाप की मनमोहन देसाई को सच्ची श्रद्धांजलि, बनाया मसाला फिल्मों का कॉकटेल

सत्यमेव जयते 2 – फोटो : अमर उजाला, मुंबई

फिल्म ‘सत्यमेव जयते 2’ एक ऐसी विधानसभा से शुरू होती है जहां सदन के नेता की मौजूदगी के बगैर ही एक अहम विधेयक प्रस्तुत कर दिया जाता है। बिना किसी बहस के वोटिंग होती है। बहस के बाद विधेयक प्रस्तुत करने वाले गृहमंत्री को बाद में दो मिनट बोलने को मिलते हैं। कानून बनवा पाने में नाकाम गृहमंत्री इसके बावजूद तुकांत कविता जैसे संवादों में भ्रष्टाचार को अपने बूते मिटाने का संकल्प लेता है। गुनहगारों के कत्ल होने शुरू होते हैं। और, सरकार को उस पुलिस अफसर को बुलाना होता है जिसके काम करने का तरीका आम पुलिस वालों से बिल्कुल अलग है। ये गृहमंत्री का छोटा भाई भी है। कहानी चिर परिचित तरीके से आगे बढ़ती है। पता चलता है कि दोनों के पिता 25 साल पहले लोकपाल बिल को लेकर चली लंबी लड़ाई के दौरान मारे गए थे। उनकी आदमकद प्रतिमा अब विधानसभा के सामने लगी है। फिल्म मनमोहन देसाई की फिल्मों का हर फॉर्मूला इस्तेमाल करती है। यहां एक लाचार मां है। बिलखते, लड़ते झगड़ते बच्चे हैं। बस एक बिंदास नायिका की बजाय मिलाप ने यहां उसे एक जिम्मेदार और संस्कारी पत्नी बना दिया है। फिल्म में दिल्ली, हैदराबाद और उन्नाव में हुई बलात्कार की घटनाओं के संदर्भ हैं। किसान की हालत पर भी कैमरा घूमता है। और, फिल्म यहां वहां से भटकती हुई आखिर में बुराई पर अच्छाई की जीत की अपनी तयशुदा मंजिल पर पहुंचकर खत्म हो जाती है।

 

 

Satyameva Jayate 2 Review: मिलाप की मनमोहन देसाई को सच्ची श्रद्धांजलि, बनाया मसाला फिल्मों का कॉकटेल

सत्यमेव जयते 2 – फोटो : अमर उजाला, मुंबई

मिलाप मिलन जवेरी अपनी कहानी को कहने में करीब सवा दो घंटे का समय लेते हैं। फिल्म का मूल गुणसूत्र (डीएनए) सही है। फिल्म की लंबाई 18 मिनट ज्यादा है और वही इस फिल्म की कमजोर कड़ी भी है। फिल्म में गाने सारे चलताऊ किस्म के हैं और साफ लगता है कि ये दिल से नहीं दिमाग से लिखे गए हैं। हिंदी सिनेमा के गानों का एक दस्तूर रहा है कि वे अपने संवेदनाओं के प्रवाह में बहते हैं। सोच सोचकर लिखी गई या यहां वहां से जुटाई गई लाइनों वाले गीत कभी कालजयी नहीं बनते। फिल्म की निर्माता कंपनी टी सीरीज की कमान नई पीढ़ी के हाथों में हैं और ये टीम चाहे तो हिंदी सिनेमा के संगीत को फिर से उसी दौर की ऊंचाई पर ले जा सकती है जिस दौर के फॉर्मूले पर फिल्म ‘सत्यमेव जयते 2’ बनी है। मिलाप मिलन जवेरी की ये फिल्म देखकर कहा जा सकता है कि वह मनमोहन देसाई के एकलव्य हैं। ओटीटी पर नित नए कलेवरों के साथ रिलीज हो रही फिल्मों के समय से वह अब भी 20 साल पीछे हैं और अपने उस कालखंड में ही कहानियां और फिल्में रचने में संतोष भी पाते हैं। बस उन्हें अपने साथ एक दो लोग ऐसे जरूर रखने चाहिए जो उन्हें विधानसभा की कार्यवाही और पुलिस संगठन में कमिश्नरेट और पुलिस अधीक्षक वाले पदानुक्रम बेहतर तरीके से समझा सकें। पुलिस अफसरों के कंधों के फीतों पर लगे सितारे और अशोक की लाट बहुत सावधानी मांगते हैं।

 

Satyameva Jayate 2 Review: मिलाप की मनमोहन देसाई को सच्ची श्रद्धांजलि, बनाया मसाला फिल्मों का कॉकटेल

सत्यमेव जयते 2 – फोटो : अमर उजाला, मुंबई

जॉन अब्राहम दो साल बाद 50 साल के हो जाएंगे। उम्र उनके चेहरे पर झलकने लगी है। युवा किरदारों को करने का उनका समय जा चुका है। लेकिन, इसके बावजूद उन्होंने मिलाप के लिखे किरदारों को जीने की पूरी कोशिश की है। कोशिश वह परदे पर सनी देओल बनने की भी करते हैं लेकिन एक साथ तीन किरदारों को एक ही फिल्म में जीना आसान नहीं होता। यहां तीनों किरदारों को वह तकरीबन एक ही जैसे जीते हैं। पुलिस की वर्दी में वह थोड़ा हंसाने की कोशिश भी करते हैं लेकिन वही फिल्म के सबसे कमजोर हिस्से भी हैं। वह हवा में उछाले गए धर्मग्रंथ को आंखों से लगाने के बाद चूमते भी दिखते हैं। करवा चौथ के गाने में झूमते दिखते हैं और किसान नेता के किरदार में अपना दमखम भी दिखाते हैं। जॉन ने पूरी फिल्म को अपने इन तीन किरदारों के सहारे आखिर तक ढोया है।

 

Satyameva Jayate 2 Review: मिलाप की मनमोहन देसाई को सच्ची श्रद्धांजलि, बनाया मसाला फिल्मों का कॉकटेल

सत्यमेव जयते 2 – फोटो : अमर उजाला, मुंबई

फिल्म ‘सत्यमेव जयते 2’ में टी सीरीज कंपनी के मुख्य प्रबंध निदेशक भूषण कुमार की पत्नी दिव्या खोसला कुमार की भी बतौर अभिनेत्री अरसे बाद बड़े परदे पर वापसी हुई है। उनके अभिनय में उनके अनुभव का अल्हड़पन नजर आता है। लगातार खुद को मांजते रहने और संवाद अदायगी का नियमित प्रशिक्षण उन्हें हिंदी सिनेमा में प्रौढ़ अभिनेत्रियों की अगली कतार में शामिल करा सकता है। फिल्म के बाकी कलाकारों में गौतमी कपूर का काम सबसे उम्दा है। एक किसान की पत्नी और सूबे के गृहमंत्री व पुलिस अफसर की मां दोनों कालखंडों में गौतमी ने बहुत अच्छा काम किया है। वह हिंदी सिनेमा की नई निरूपा राय बनने की ओर अग्रसर दिखती हैं। जाकिर हुसैन और दया शंकर पांडे फिल्म में जब मौका मिलता है तो अपना असर दिखाने की पूरी कोशिश करते हैं। फिल्म की एक और कमजोर कड़ी इसमें किसी दमदार खलनायक का न होना भी है। हीरो से हीरो लड़ता रहता है और विलेन जब सामने आता है तो वह फिल्म का ग्राफ एकदम से गिरा देता है।

 

Satyameva Jayate 2 Review: मिलाप की मनमोहन देसाई को सच्ची श्रद्धांजलि, बनाया मसाला फिल्मों का कॉकटेल

सत्यमेव जयते 2 – फोटो : अमर उजाला, मुंबई

कोरोना संक्रमण काल के बाद रिलीज हो रही फिल्मों से बहुत ज्यादा उम्मीद दर्शक इसलिए भी नहीं कर रहे हैं कि उन्हे अरसे बाद घर से बाहर आकर किसी जगह (सिनेमाहाल) में दो ढाई घंटे का समय खुद के साथ बिताने का मौका मिल रहा है। ऐसे में कोई फिल्म अगर बिना ज्यादा बोर किए भी ये समय बिताने में उसे मदद करती है तो अच्छा ही है। फिल्म ‘सत्यमेव जयते 2’ को सीक्वेल की कसौटी पर कसा जाए तो ये एक औसत फिल्म है लेकिन जॉन अब्राहम के ट्रिपल रोल ने इसे एक मनोरंजक मसाला फिल्म बनाने में कामयाबी पाई है। फिल्म मनमोहन देसाई युग के सिनेमा को मिलाप की श्रद्धांजलि भी है और उनके लिए एक सबक भी। उम्मीद की जानी चाहिए कि वह अपनी अगली फिल्म को आज के समय के हिसाब से बनाने की कोशिश करेंगे और अगली फिल्म में सरकारी कार्यप्रणाली की बेहतर समझ भी सामने लाएंगे। ऐसा इसलिए भी जरूरी है कि क्योंकि सिनेमा उन दर्शकों के लिए किसी सबक से कम नहीं होता जिन्हें इन सब चीजों की गहराई तक खुद से जाने का मौका कम मिलता है।

 

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