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ग्वालियर कोर्ट में बहस पूरी हुई…: अंतिम बहस के बाद तत्कालीन निगम आयुक्त ने कहा- मुझे IAS अवार्ड होने वाला था, इसलिए बनाया आरोपी

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ग्वालियर30 मिनट पहले

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फाइल फोटो

  • 29 नवंबर तक इस मामले में आ सकता है फैसला

ग्वालियर नगर निगम के जल प्रदाय विभाग में हुए घोटाले के मामले में सेशन कोर्ट में बहस पूरी हो चुकी है। अब इस मामले में 29 नवंबर को संभावित फैसला आ सकता है। अंतिम बहस में तत्कालीन नगर निगम आयुक्त विवेक सिंह ने भी अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कोर्ट में कहा कि उनको IAS अवार्ड होना था। जिसे रोकने के लिए विशेष स्थापना पुलिस ने उन्हें आरोपी बनाया है। उनका इस मामले से ही कोई संबंध नहीं है। उन्होंने राजनीतिक दबाव में आकर यह कार्रवाई करने तक की बात कही है। इस दौरान मामले से जुड़े अन्य आरोपियों ने भी कोर्ट में अपना पक्ष रखा है। कोर्ट ने बहस पूरी करने के बाद अगली तारीख 29 नवंबर की दी है। संभवता 29 को इस मामले में फैसला आ सकता है।
यह है पूरा मामला
– वर्ष 2004 में जब विवेक सिंह नगर निगम आयुक्त हुआ करते थे तब नगर निगम के जलप्रदाय विभाग में 1200 फाइलें तैयार की गई थीं। इन फाइल में छोटे-छोटे भुगतान की तैयारी थी। ऐसे भुगतान किए जा रहे थे, जिनका काम मौके पर नहीं था। कुछ फाइलों में भुगतान हो गया था। जब इस मामले की शिकायत लोकायुक्त पुलिस के पास की गई तो 12 फाइलों की जांच की गई। जांच में पाया कि फर्जी तरीके से भुगतान किए जा रहे हैं। इसमें जब बड़ा भ्रष्टाचार किए जाने की बात सामने आई थी। इसमें तत्कालीन निगमायुक्त विवेक सिंह सहित अन्य अधिकारियों को आरोपी बनाया गया था। लोकायुक्त ने जांच के बाद विशेष न्यायालय में चालान पेश किया। आरोपियों ने लोकायुक्त की जांच को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन हाई कोर्ट ने यह कहते हुए याचिकाओं का निराकरण कर दिया कि मामले की शीघ्र ट्रायल खत्म की जाए। हाई कोर्ट के आदेश पर इस मामले की ट्रायल लगातार जारी है। सभी गवाह हो चुके हैं। जिन पार्षदों के लेटर पेड पर प्रस्ताव तैयार किए थे, उन्होंने प्रस्ताव भेजने से इनकार कर दिया था। जांच अधिकारी की गवाही पूरी होने के बाद बचाव पक्ष को सुना गया। आरोपियों की ओर से अपने बचाव में तर्क दिए गए। मंगलवार को इस मामले में बहस पूरी हो गई। विशेष लोक अभियोजक अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि यह मामला प्रमाणित है और स्वच्छ साक्ष्य प्रस्तुत किए गए हैं।
29 को संभावित फैसला
– इस मामले में मंगलवार को अंतिम बहस के दौरान तत्कालीन नगर निगम आयुक्त विवेक सिंह ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनको IAS अवार्ड होने वाला था, इसलिए इस मामले में फंसाया गया है, जबकि इस मामले से उनका कोई भी सीधा लेना देना नहीं है। अब 29 नवंबर को इस मामले की सुनवाई होना है। 29 को संभावित माना जा रहा है कि इस मामले में फैसला सुनाया जा सकता है।

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